मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर, जयपुर-302017 (राजस्थान) भारत
| मुख्य संरक्षक: | प्रो. नारायण प्रसाद पाढ़ी, निदेशक, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर | विस्तृत प्रोफ़ाइल |
| प्रधान संपादक: | डॉ. कमलेंद्र अवस्थी, भौतिकी विभाग डॉ. विवेकानन्द, ऊर्जा एवं पर्यावरण केंद्र |
विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल |
| संपादक - मंडल: | प्रो. नारायण प्रसाद पाढ़ी प्रो. अखिलेन्द्र भूषण गुप्ता प्रो. अमर पटनायक प्रो. राज कुमार व्यास डॉ. कमलेंद्र अवस्थी डॉ. विवेकानन्द डॉ. आशीष त्रिपाठी डॉ. नीरजा सारस्वत डॉ. रितु अग्रवाल डॉ रीता सिंह डॉ. ऋषि कुमार तिवारी |
विस्तृत प्रोफ़ाइल
विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल विस्तृत प्रोफ़ाइल |
हिंदी में वैज्ञानिक लेखन, संचार और शोध के प्रसार को बढ़ावा देने के प्रयासों के अंतर्गत, मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर के राजभाषा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में “अभिरुचि - वैज्ञानिक पत्रिका” नामक एक नई शोध पत्रिका का प्रकाशन कर रहा है। आपका सहयोग अपेक्षित है। पत्रिका का उद्देश्य निम्नलिखित है:
1. हिंदी में वैज्ञानिक और तकनीकी लेखन को प्रोत्साहित करना।
2. विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों को वैज्ञानिक विचारों और नवाचारों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करना।
3. राजभाषा के लिए भारत सरकार की पहल के अनुरूप उच्च शिक्षा और अनुसंधान में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना।
अभिरुचि का उद्देश्य अनुसंधान की गुणवत्ता को बढ़ाना और उत्तर भारतीय क्षेत्र के शोधकर्ताओं को सम्मेलन और समीक्षात्मक लेखों के माध्यम से जोड़ना इस पत्रिका का मुख्य उद्देश्य है। शोध पत्रिका में विज्ञान, अभियांत्रिकी, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी से जुड़े क्षेत्रों में मौलिक शोध कार्य मुख्य रूप से प्रकाशित किए जाएंगे। यह पत्रिका अनुसंधान समुदाय के बीच हिंदी भाषा की वैज्ञानिक स्वीकार्यता एवं महत्ता को स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अभिरुचि-वैज्ञानिक पत्रिका” अनुसंधान प्रवृत्ति की है तथा यह पत्रिका केवल उन्हीं रचनाओं पर विचार करती है जो क्षेत्रविशेष की उपलब्ध ज्ञान राशि में विस्तार करने वाली हों। प्रस्तुत लेख लेखकों द्वारा लिखित मौलिक शोध या समीक्षा कार्य होना चाहिए। पांडुलिपि स्पष्ट रूप से हिंदी में लिखी होनी चाहिए, सुव्यवस्थित और समझने में आसान होनी चाहिए, और सभी कथनों को प्रासंगिक संदर्भों द्वारा उचित रूप से समर्थित किया जाना चाहिए। लेखकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पांडुलिपि साहित्यिक चोरी से मुक्त हो। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित पाठ वाली पांडुलिपियाँ स्वीकार्य नहीं हैं। लेख पठनीय, बोधगम्य तथा आवश्यक स्रोत-संदर्भों से युक्त होना चाहिए। वह सुबोध हिंदी यूनीकोड में टंकित किया हुआ होना चाहिए।
सभी प्रस्तुतियाँ संबंधित क्षेत्र के स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा कठोर सहकर्मी-समीक्षा प्रक्रिया से गुजरेंगी। समीक्षकों की टिप्पणियों के आधार पर लेखकों को अपनी पांडुलिपियों में संशोधन करने की आवश्यकता हो सकती है। लेखकों को किसी भी वित्तीय या गैर-वित्तीय हितों के टकराव का खुलासा करना होगा जो शोध या उसकी व्याख्या को प्रभावित कर सकता है। संपादकीय निर्णय (स्वीकृति, संशोधन या अस्वीकृति) समीक्षकों के मूल्यांकन, वैज्ञानिक योग्यता, मौलिकता और पत्रिका के दायरे से प्रासंगिकता पर आधारित होगा।
2026 (प्रगति पर है)
अभिरुचि -वैज्ञानिक पत्रिका कवर पेज